भारत वहीं देश था, वहीं देश है
जहां नारी का सम्मान किया जाता है
क्योंकि यही वो देश है , जहां की नारी सर्वशक्तिमान है
ये ना सोच मुसाफिर , कितने अफसोस की बात है
ये सोच मुसाफिर की व्यक्ति अब खामोश नहीं
आने लगी जुबान है
होने लगा शोर है
हाहाकार हर ओर है

जिनकी जुबान में ताले थे
उनको जुबान देने को चार और है
सोचकर कि खौफ कितना वो दरिंदा दे सकेगा
बोलते थे तुझे कौन ही अपनाएगा
भूल गए वो लोग, की अब वो किसी को नहीं आपनाएगी
खामोश रही थी जो कभी
शायद वो शंखनाद करेगी
ये नारी जिस धरती की है
वो अब शैतानों संहार करेगी।

जान लो कमजोर जो कह गया है नारी को
भूल रहा है वो इस मसले की आह को
जब विपदा आई इस संसार पर
बन गई वो दुर्गा, काली कर गई संहार सब
रोक ना सके महादेव जब
शान्त कराया , रखा पैरों तले, खुद जब

क्या कर सकेगी नारी जो पूछते हैं
तो भूलना जाना उस फूलन देवी को
जिसने लगाया था सब दरीदों को कतार
चला दी गोली और लिखा इतिहास

जब भी पानी गया सिर से ऊपर
नारी ने लिए अवतार
कमजोर ना समझ एक मूर्ख प्राणी
यही है वो धरती जहां नारी करती नरसंहार है।

वो सती भी अपनी इच्छा से बनी और सावित्री भी
वो सीता भी अपनी इच्छा , और दुर्गा भी
वो जीवनदायनी भी है और काली भी है।
नारी वहीं जो दुर्गा भी है काली भी।


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