औरत एक मनोरंजन या मजबूर

समझ नहीं आता औरत एक मनोरंजन या मजबूर समझ नहीं आता खुश हो जाऊ , की शोर तो हुआ कम से कमया फिर से दुखी। कि आखिर ये क्यों हुआकैसी ये न्याय शैली है,जो औरतों के सामने इतनी मजबूर है,बेबस और बेचारी है,अफसोस तो इस बात का होगा, आवाजें कई Read more…

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